Poem – Bade to Tum Bade Raho

  • Alok 
Alok Verma Motivational Speaker

कविता – बड़े हो तुम | Inspirational poem

Poem

बड़े हो तुम बड़े रहो 

बदल गया अगर सब कुछ 

तो यू ना तुम डरे रहो 

बड़े हो तुम बड़े रहो 

निराश ना खड़े रहो 

अकेले ना पड़े रहो 

उजाले की कमान लो 

धरा को तुम सम्भाल लो 

तुम अपनी राह बांच लो 

खुद ही से जा के जाँच लो 

बनाओ अपनी ही निशा  

बनाओ अपनी ही सहर  

बनाओ अपनी ही दिशा 

बनाओ अपने ही नहर 

तूफ़ान में खड़े रहो 

बड़े हो तुम बड़े रहो 

सभी को अपने हाँथ दो 

सभी के दुःख में साथ दो 

सभी की आँखें खोल दो 

सभी को जाकर बोल दो 

की लोभ पाप त्याग दे 

उनकी चिता को आग दे 

जुर्म की नज़र में शर्म हो 

बस एक धर्म कर्म हो 

खुद में सुधार लाएँगे 

सब आप सुंदर पाएँगे 

सभी को इक विश्वास हो 

सबको विजय की प्यास हो 

तुम ऐसी राह पर चले 

तो कष्ट बहुत पाओगे 

मगर अखंड सत्य है 

हर युद्ध जीत जाओगे 

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