Browsing Category : Poems

alok verma

Smartphone


रिश्तों के दृढ़ बंधन में कौन आ गया ? देखा तो जाना हाथो में स्मार्ट फ़ोन आ गया। शाम चाय पर होने वाली, वो बात रह गयी गरमी के रातों वाली, मुलाक़ात रह गयी चिट्ठी में आने वाला प्रेम, फ़ेल हो गया छोटी सी बात पर भी अब ईमेल हो गया क्या हो रहा है सामने? इसकी सुध नहि रहती…



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alok verma

आरक्षण पर कविता


यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है? जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है प्रतियोगिता के काल में कोटा क्यों बना दिया? भारत की महान शिक्षा को छोटा क्यों बना दिया? यह हमारी कमज़ोरी है या समाज का विकार है? यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है? जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है रचियता को…



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alok verma

मेरा देश महान है.. (On Kargil War 1999)


छाती ठोक के केहता हु की मेरा देश महान है बस कपड़े के बने तिरंगे में अमर प्राण है । छाती ठोक के केहता हु की मेरा देश महान है .. मौका अच्छा पाकर दुश्मन घुस आया घर के अन्दर आया था सपने में की कश्मीर लेकर जायेगा लौट के अपने मुल्क में वापिस इज्ज़त बहुत कमाएगा बेचारे की किश्मत…



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alok verma

Darakhth


ज़न्नत और कयामत के बीच, अब बस कुछ दरख्त खड़े है वोह हमसे बड़े या हम उनसे बड़े है… हमे आशिया देने को, कितने गुलशन तबाह हुए हमारी किश्तिय खेने को, कितने घर कुरबा हुए “होली”, “लोहड़ी” के नाम पे, कितने सपनो को राख किया खेती के लालच में, पुरे जंगल को खाक किया आज माज़रा यह है की, सांसो…



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alok verma

Mitti Ki Kahani


Mitti leke toadd liya sab dhelo* ko phod liya Mitti ko phir chaan liya Paani daal ke saan liya Chaak chalaya tezi se Haath hilaya tezi se Mitti ko aakar diya Do haantho.N ka pyar diya Phir Mitti chal di jalne ko Pakk ke pakki ban.ne ko Kaisi Mitti ki kaya hai Yu Jalke jeevan paaya hai Ab Mitti kaam…



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alok verma

Aaj phir woh aayi..


Aaj phir woh aayi aur huske baat kar gayi Bechaini ke silsille ki shuruaat kar gayi Aaj phir woh aayi aur huske baat kar gayi Bade garv se mujhko apna dost kehti hai meri baatein sunn ke Muskuraati rahti hai usse milke mujhko kya kuch khona padta hai Nahi jaanti raat ko us din rona padta hai yahi haadsa aaj…



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alok verma

ओश की एक बूँद….


ओश की एक बूँद जैसे सूखे दिन के ताप से जम गए सब आंसू मेरे यु ही अपने आप से जो पड़ा है वज्र मुझपे तो मै गम को क्यों सहु रोते होंगे दुनिया वाले मै भी क्यों रोता रहू देखा मैंने काफी जीवन बात इतनी साफ़ है जो भी पाना जो भी खोना, करना अपने आप है बढ़ गए…



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alok verma

There was a Girl…


There was a girl who was my friend She lived in my heart at the deeper end She was the fellow to whom I cared Betwixt us all sentiments were shared Her eyes were beautiful just like sea I knew she felt best with me I can’t forget her for a while And yes she got a lovely smile She…



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Licensed Sin


Existence of Reservation is a foul way to win In the context of today it’s a licensed Sin Those who do less study, easily get the favour It’s a great disappointment for those who do labour We are living in India, a land of Educational Heritage But now our education is going to reserved wastage The creators have no knowledge…



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THE SECOND SUN


One day at once the Sun rose No, not from the horizon, but from the mid city Sunbeams had fallen No, not from the sky, but from the burst Earth The shadow of Humans became directionless and spread everywhere It was fact that the Sun had not risen from the east that day It was thrown from the flying Machine…



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