Monthly Archives : September 2015

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Smartphone

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रिश्तों के दृढ़ बंधन में कौन आ गया ? देखा तो जाना हाथो में स्मार्ट फ़ोन आ गया। शाम चाय पर होने वाली, वो बात रह गयी गरमी के रातों वाली, मुलाक़ात रह गयी चिट्ठी में आने वाला प्रेम, फ़ेल हो गया छोटी सी बात पर भी अब ईमेल हो गया क्या हो रहा है सामने? इसकी सुध नहि रहती…




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आरक्षण पर कविता

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यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है? जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है प्रतियोगिता के काल में कोटा क्यों बना दिया? भारत की महान शिक्षा को छोटा क्यों बना दिया? यह हमारी कमज़ोरी है या समाज का विकार है? यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है? जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है रचियता को…




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